आँकड़ों और विज्ञापन के लिए कुकीज़
हम आँकड़ों और विज्ञापन के लिए कुकीज़ इस्तेमाल करते हैं, दोनों Google को जाती हैं। मना करने से आपको दिखने वाली किसी चीज़ में कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।निजता पेज पढ़ें
°C = K − 273.15
कोई मान लिखिए और केल्विन से डिग्री सेल्सियस का हिसाब लिखते-लिखते साथ-साथ चलता रहेगा। यहाँ कोई सीधा गुणक नहीं बल्कि पैमाने का खिसकाव है, और इसीलिए नीचे दिए सूत्र में जोड़ भी शामिल है। हिसाब आपके अपने डिवाइस पर होता है, और आपका लिखा हुआ अंक कहीं नहीं भेजा जाता।
293.15 K is 20 °C
— आरामदेह तापमान वाला कमरा.
0 K is -273.1 °C
— परम शून्य.
473.1 K is 200 °C
— गरम ओवन.
318.1 K is 45 °C
— उत्तर भारत में मई की दोपहर.
| K | °C |
|---|---|
| -40 | -313.15 |
| -18 | -291.15 |
| 0 | -273.15 |
| 20 | -253.15 |
| 37 | -236.15 |
| 100 | -173.15 |
| 200 | -73.15 |
K से °C में बदलें
केल्विन परम शून्य से शुरू होता है, जहाँ से और ऊष्मा ऊर्जा निकाली ही नहीं जा सकती, और उसके क़दम सेल्सियस जितने बड़े हैं। इस पर डिग्री का चिह्न नहीं लगता: 300 K लिखा जाता है, 300 °K नहीं।
सेल्सियस शून्य को पानी के जमने पर और सौ को उसके उबलने पर रखता है, समुद्र तल पर। ऐंडर्स सेल्सियस ने पैमाना उलटा सुझाया था: उनके यहाँ शून्य उबलने का बिंदु था।
केल्विन और डिग्री सेल्सियस एक ही जगह से गिनना शुरू नहीं करते, इसलिए कोई अकेला अंक इन दोनों के बीच नहीं बदल सकता। गुणा करना ठीक वही ग़लती है जिससे बचाने के लिए यह पेज है: वह सिर्फ़ एक तापमान पर सही बैठती है और बाक़ी हर जगह चूकती है, और उस बिंदु से जितना दूर जाइए, चूक उतनी बढ़ती है।
इस पेज के अपने दोनों सिरे यह दिखा देते हैं। 0 K बराबर -273.15 °C और 100 K बराबर -173.15 °C: एक तरफ़ सौ क़दम, दूसरी तरफ़ 100, और दोनों पैमानों के शून्य अलग-अलग जगह बैठे हैं। इसीलिए ऊपर वाले सूत्र के दो हिस्से हैं, एक जिससे गुणा हो और एक जिसे जोड़ा जाए; जोड़ हटा दीजिए तो नतीजा धीरे-धीरे ग़लत होना छोड़कर सीधे बहुत ग़लत हो जाता है।
केल्विन परम शून्य से शुरू होता है — वह बिंदु जहाँ निकालने को कोई ऊष्मीय ऊर्जा बची ही नहीं, और जिसके नीचे नापने को कुछ है ही नहीं। यही उसे ऐसा पैमाना बनाता है जिस पर गुणा करना सचमुच चलता है: 200 K वाक़ई 100 K का दुगुना है, उस तरह से जिस तरह 200 °C, 100 °C का दुगुना नहीं होता।
सेल्सियस और फ़ारेनहाइट यह दावा नहीं कर सकते। उनके शून्य चुने गए थे, मिले नहीं थे, और इसीलिए सेल्सियस का दुगुना पाठ कुछ भी नहीं कहता।
केल्विन से सेल्सियस तक जाने के लिए सिर्फ़ 273.15 घटाना है, क्योंकि दोनों पैमानों की डिग्री एक ही नाप की है — सिर्फ़ शून्य अलग जगह बैठा है। 300 K बराबर 26.85°C है, 273.15 K बराबर 0°C है, और 0 K, यानी परम शून्य, बराबर −273.15°C है।
यह जाँचने का तरीक़ा है 300 के आस-पास देखना। किसी इंसान के आस-पास की हर चीज़ 250 से 320 K के बीच बैठती है, तो इससे कोसों दूर कोई अंक — जैसे हज़ारों में केल्विन — गर्मी की बजाय रंग-तापमान की बात कर रहा होता है, जो बिलकुल अलग विषय है।
भारतीय बाज़ार में बिकने वाला LED बल्ब «Warm White» के साथ 2700 K या «Cool Daylight» के साथ 6500 K लिखा होता है, और यह अंक बल्ब की असली गर्मी नहीं बताता — यह रंग-तापमान है, वह अंक जिस पर एक आदर्श काला पिंड गरम करने पर उसी रंग की रोशनी देगा। असली LED शायद 60°C पर चल रहा हो।
2700 K को 2,427°C में बदलना गणित की तरह सही और सवाल के लिहाज़ से बेकार है, क्योंकि यह एक काल्पनिक भट्ठी के बारे में बात करता है, हाथ में पकड़े बल्ब के बारे में नहीं। रंग का नाम पढ़िए, अंक नहीं।
2700 K को «गर्म» और 6500 K को «ठंडा» कहा जाता है, जबकि भौतिकी में 6500 K असल में कहीं ज़्यादा गर्म है। यह शब्द रंग के एहसास से आते हैं — पीली-नारंगी रोशनी गर्म लगती है, नीली ठंडी।
यही उलझन घर सजाते वक़्त सबसे महँगी पड़ती है — कोई आरामदायक कमरा चाहने वाला बड़ा अंक चुनता है क्योंकि वह «ज़्यादा गर्मी» जैसा लगता है, और 5000 K ख़रीद लेता है, जो दोपहर की बादल भरी रोशनी जैसा है।
लगभग एक हज़ार केल्विन से ऊपर 273.15 का फ़र्क़ मामूली रह जाता है। सूरज की सतह लगभग 5,772 K है, यानी 5,499°C, और इसे 5,500°C कहना कुछ नहीं खोता, क्योंकि मूल अंक में ही 273.15 से बड़ी अनिश्चितता है।
यही वजह है खगोल-विज्ञान लगभग हर जगह केल्विन में बात करता है — शुक्र ग्रह की सतह 737 K, यानी 464°C है, और ब्रह्मांडीय पृष्ठभूमि विकिरण 2.725 K, यानी −270.4°C, जहाँ सारा जवाब लगभग पूरी तरह उसी स्थिरांक से बना है।
लगभग 100 K से नीचे सेल्सियस अंक मददगार नहीं रहता। तरल नाइट्रोजन 77 K पर उबलता है, यानी −196°C, और तरल हीलियम 4.2 K पर, यानी −269°C — सेल्सियस में तापमान को आधा करना −196 से −235 जैसा दिखता है, जो छोटा बदलाव लगता है और है नहीं।
केल्विन में वही क़दम 77 से 38.5 है, जो साफ़-साफ़ आधा दिखता है — इसीलिए क्रायोजेनिक्स केल्विन में लिखा जाता है, स्वाद की बात नहीं।
किसी डेटा-शीट पर ppm/K या K/W में दिया गुणांक एक बदलाव बताता है, और बदलाव सेल्सियस में वही अंक रहता है — कुछ घटाया नहीं जाता। 50 ppm/K का मतलब है 50 ppm प्रति डिग्री सेल्सियस।
तिरछी रेखा (/) ही पहचान है — रीडिंग 300 K लिखी जाती है, दर per K लिखी जाती है, और सिर्फ़ रीडिंग 273.15 लेती है। थर्मिस्टर का B-वैल्यू इसका असली अपवाद है, क्योंकि वह 1/T के घातांक के भीतर बैठता है और उसे परम तापमान ही चाहिए।
कैमरे का व्हाइट-बैलेंस डायल केल्विन में सेट होता है ताकि वह दृश्य पर पड़ रही रोशनी के रंग को बताए, न कि वह रंग जो फ़ोटो में चाहिए। तापदीप्त बल्ब की लगभग 3,200 K रोशनी में डायल को 3,200 K पर रखना सफ़ेद रंग सही दिखाता है, जबकि उसे 5,600 K पर रखना कैमरे को यह भरोसा दिलाता है कि रोशनी नीली है, तो वह सब कुछ नारंगी की तरफ़ मोड़ देता है।
दिशा उलटी लगती है — अंक बढ़ाने पर तस्वीर गर्म रंग की हो जाती है, जो भौतिकी के उलट है। इस सेटिंग को सेल्सियस में बदलने का कोई मतलब नहीं — 3,200 K होगा 2,927°C, एक काल्पनिक फ़िलामेंट का दावा, कैमरा मेन्यू के पन्ने पर।
तापमान में कोई तय बदलाव-मान होता ही नहीं, क्योंकि दोनों पैमाने अलग-अलग बिंदुओं से शुरू होते हैं। सूत्र नीचे दिया है, और ऊपर वाला कैलकुलेटर आपको हाथ से भरने की मेहनत बचा देता है।
नहीं। हिसाब आपके ब्राउज़र में होता है। आप कनेक्शन काटकर भी गिनती जारी रख सकते हैं, और जाँचने का सबसे आसान तरीक़ा भी यही है।
क्योंकि सेल्सियस और फ़ारेनहाइट एक ही बिंदु से शुरू नहीं होते। लंबाई या वज़न में शून्य सचमुच शून्य होता है और एक गुणक काफ़ी रहता है। तापमान में शून्य कहीं और पड़ता है, और इसीलिए सूत्र में एक खिसकाव भी चाहिए।
एक °C बराबर 274.15 K होता है। यह वही रिश्ता है, बस उलटा पढ़ा हुआ — इसलिए एक पेज से मिला नतीजा दूसरे पेज से गुज़ारने पर वहीं लौटना चाहिए जहाँ से चला था।
इस पेज पर तापमान की इकाइयाँ के बारे में जो कहा गया है, वह जाँचा जा सकता है, और ये रहे वे दस्तावेज़ जो उसे तय करते हैं।
गुणक पेज के अंदर एक स्थिरांक है और गणित चार क्रियाओं का है, इसलिए कुछ कहीं भेजा नहीं जाता और भेजने की ज़रूरत भी नहीं। आप जो संख्या लिखते हैं वह ब्राउज़र से बाहर नहीं जाती — उसे ले जाने वाला कोई अनुरोध ही नहीं है।